उद्धव ठाकरे बोले- ‘गद्दारों’ को भरोसा दिया जा रहा कि PM उनके साथ हैं
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उनकी हालिया मुलाकातों को लेकर सवाल उठाए हैं। ठाकरे ने खास तौर पर अपनी पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए छह सांसदों से प्रधानमंत्री की मुलाकात पर आपत्ति जताई। उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के पास प्रदर्शन कर रहे युवाओं से मिलने का समय नहीं है, लेकिन उनकी पार्टी छोड़ने वाले नेताओं से मुलाकात के लिए समय है। उन्होंने इस मुलाकात को लेकर कई सवाल खड़े किए। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक दिन पहले एनडीए के घटक दलों के सांसदों के साथ नाश्ते पर बैठक की थी। इसके बाद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनकी पार्टी के छह नवनिर्वाचित सांसदों ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की।
मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उद्धव ठाकरे ने सवाल किया कि जब उनकी पार्टी से जुड़े सांसदों को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है, तब प्रधानमंत्री की इन सांसदों से मुलाकात का क्या उद्देश्य था। ठाकरे ने आरोप लगाया कि क्या इस मुलाकात के जरिए सुप्रीम कोर्ट पर किसी तरह का दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में संविधान और कानून के आधार पर फैसला करेगा। उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) ने निर्वाचन आयोग के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना माना गया था। इसके अलावा लोकसभा अध्यक्ष के उस फैसले को भी चुनौती दी गई है, जिसमें छह सांसदों के दूसरे शिवसेना गुट में जाने को मान्यता दी गई थी। ठाकरे ने सवाल उठाया कि जब मामला न्यायपालिका के सामने है तो ऐसे समय में इन सांसदों के साथ प्रधानमंत्री की मुलाकात की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट के सामने भी उठाया जाएगा।
उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री की इस मुलाकात के जरिए न्यायपालिका, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह या महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर किसी तरह का दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। देश में युवाओं के विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी उद्धव ठाकरे ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मौजूदा स्थिति को ‘तूफान से पहले की शांति’ बताते हुए कहा कि जेन-जी युवाओं के प्रदर्शन ने सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। ठाकरे ने दावा किया कि युवाओं की आवाज सुनने के बजाय कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती की गई। उन्होंने संसद की ओर मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का भी जिक्र किया और कहा कि अब सरकार में बदलाव का समय आ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए ठाकरे ने कोरोना काल के दौरान अपने फेसबुक लाइव को लेकर हुई आलोचना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें फेसबुक लाइव करने के लिए निशाना बनाया गया था, लेकिन अब प्रधानमंत्री इंस्टाग्राम के जरिए सरकार चला रहे हैं।
उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री देश के भविष्य यानी युवाओं से संवाद करने से बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को युवाओं की समस्याओं और उनकी मांगों को गंभीरता से सुनना चाहिए। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की जेन-जी युवाओं से हुई मुलाकात पर भी ठाकरे ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि युवा उनकी बात सुनने के लिए तैयार नहीं हैं और सरकार को प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। ठाकरे ने झारखंड सरकार से भी प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ संवाद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं के सवालों का जवाब बातचीत और लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाना चाहिए, न कि टकराव के जरिए। उद्धव ठाकरे के इन बयानों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज होने के आसार हैं। प्रधानमंत्री की एकनाथ शिंदे और छह सांसदों के साथ मुलाकात को लेकर उठाए गए सवालों पर भाजपा और शिंदे गुट की प्रतिक्रिया का भी इंतजार रहेगा।

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