सुप्रीम कोर्ट बोला- राजनीति में आए हैं तो विरोध से क्यों डरती हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा को बड़ा झटका देते हुए उनकी उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने पुलिस के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूछताछ की अनुमति मांगी थी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि जांच का सामना करना होगा और केवल सांसद होने के आधार पर किसी प्रकार की विशेष छूट नहीं दी जा सकती। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ के समक्ष महुआ मोइत्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि उनकी मुवक्किल जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से उन्हें वर्चुअल माध्यम से पूछताछ की अनुमति दी जाए। वकील ने अदालत को बताया कि पिछली बार जब महुआ मोइत्रा अपने निर्वाचन क्षेत्र के पुलिस थाने पहुंची थीं, तब उनके विरोध में प्रदर्शन हुआ था और उन पर अंडे भी फेंके गए थे। इस दलील पर न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल सांसद होने के कारण विशेष सुविधा नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक जीवन और राजनीति का रास्ता चुनता है तो उसे विरोध का सामना करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। अदालत के इस रुख के बाद महुआ मोइत्रा की ओर से उनके वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार करते हुए मामले का निस्तारण कर दिया।
इसी मामले से जुड़े एक अन्य पहलू में सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा को कथित हेट स्पीच मामले में भी कोई राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया, जिसमें उन्हें 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने पेश होकर जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया था। महुआ मोइत्रा के खिलाफ पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के होगलबेरिया थाने में धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में मामला दर्ज है। उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द करने और पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी। हालांकि हाईकोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देते हुए स्पष्ट किया था कि यह राहत तभी जारी रहेगी, जब वह जांच में पूरा सहयोग करें और पुलिस के नोटिस का पालन करें। सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखने के बाद अब महुआ मोइत्रा को निर्धारित तिथि पर जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होना होगा। मामले की अगली सुनवाई कलकत्ता हाईकोर्ट में 1 अक्टूबर को होगी, जहां एफआईआर और अन्य कानूनी पहलुओं पर आगे विचार किया जाएगा।

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