उत्तराखंड जनसंवाद में गूंजे जल-जंगल-जमीन के सवाल, विधानसभा चुनाव से पहले साझा घोषणा पत्र की तैयारी

उत्तराखंड में जल, जंगल, जमीन, संस्कृति, पलायन और जन-अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने एक साझा मंच पर चर्चा की। देहरादून के हरिद्वार बाईपास स्थित संस्कृति विभाग के ऑडिटोरियम में ‘रचनात्मक कांग्रेस’ और विभिन्न सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय ‘उत्तराखंड जनसंवाद’ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राज्य के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, अधिवक्ताओं, महिला प्रतिनिधियों और अन्य लोगों ने उत्तराखंड की मौजूदा चुनौतियों पर अपने विचार रखे। दिनभर चले मंथन के दौरान भू-कानून, पलायन, अनियोजित शहरीकरण, पर्यावरण, कुटीर उद्योग, विस्थापन, सामाजिक न्याय, महिला अधिकार और पर्यटन जैसे कई विषयों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम के दौरान यह निर्णय लिया गया कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले विभिन्न जनसंगठनों और नागरिक समूहों के सुझावों के आधार पर एक साझा घोषणा पत्र तैयार कर जारी किया जाएगा।

तीन सत्रों में उठे उत्तराखंड के मूल सवाल

जनसंवाद के दौरान अलग-अलग सत्रों में राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने अपने अनुभव और विचार साझा करते हुए समस्याओं के समाधान के लिए नीतिगत बदलावों और जनभागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया।

भू-कानून और जमीन की खरीद-फरोख्त पर चर्चा

भू-कानून और राज्य में जमीन की खरीद-फरोख्त का मुद्दा चर्चा के प्रमुख केंद्र में रहा। वरिष्ठ पत्रकार जयसिंह रावत ने राज्य में कड़े भू-कानून की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने राज्य में समय-समय पर किए गए भू-कानून संबंधी बदलावों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इन संशोधनों से बाहरी पूंजी और बड़े निवेशकों के लिए जमीन खरीद का रास्ता आसान हुआ है। पत्रकार राहुल कोटियाल ने भी सरकारी जमीन से जुड़े मामलों को लेकर चिंता जताई और सरकारी भूमि के इस्तेमाल एवं बिक्री में पारदर्शिता सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता पर बात रखी।

पलायन और अनियोजित शहरीकरण बना बड़ा मुद्दा

उत्तराखंड की लंबे समय से चली आ रही पलायन की समस्या और तेजी से बढ़ते शहरीकरण पर भी चर्चा हुई। डॉ. प्रेम बहुखंडी ने कहा कि रोजगार या बेहतर अवसरों के लिए लोगों का बाहर जाना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन ऐसी परिस्थितियां बनाना जरूरी है जिससे लोग अपनी जड़ों और गांवों से भी जुड़े रह सकें। वहीं विजय भट्ट ने शहरों के अनियोजित विस्तार से पैदा होने वाली समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया। उनके मुताबिक बढ़ती आबादी के दबाव के बीच शहरी नियोजन, बुनियादी सुविधाओं और पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

जंगल और पर्यावरण संरक्षण पर भी उठे सवाल

जनसंवाद में पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से विचार हुआ। हिमांशु अरोड़ा ने विकास परियोजनाओं के नाम पर होने वाली वन कटाई को लेकर सवाल उठाए और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखकर विकास मॉडल तैयार करने की जरूरत बताई। जगदम्बा मैठाणी ने पहाड़ी क्षेत्रों के कुटीर उद्योगों और स्थानीय आजीविका से जुड़े मुद्दों को उठाया। चर्चा में स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक रोजगार के संरक्षण पर जोर दिया गया। इसके अलावा उत्तराखंड में पारंपरिक जल स्रोतों यानी नौले और धारों के सूखने, पर्यावरणीय क्षति और जल संकट जैसे विषय भी चर्चा का हिस्सा रहे।

किसाऊ बांध से संभावित विस्थापन का मुद्दा भी उठा

जनसंवाद में किसाऊ बांध परियोजना से जुड़े संभावित विस्थापन और उससे प्रभावित होने वाले लोगों की चिंताओं पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने विकास परियोजनाओं के साथ स्थानीय आबादी के अधिकारों, पुनर्वास और आजीविका से जुड़े पहलुओं को भी प्राथमिकता देने की जरूरत बताई। स्थानीय लोक कलाकारों और पहाड़ी संस्कृति से जुड़े लोगों की उपेक्षा का मुद्दा भी कार्यक्रम में उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि राज्य की पहचान और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए स्थानीय कलाकारों और परंपराओं को उचित मंच मिलना चाहिए।

सामाजिक न्याय और महिला अधिकारों पर भी मंथन

जनसंवाद में सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता दी गई। दीपा कौशलम ने महिलाओं की पारिवारिक और सामाजिक निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी तथा न्याय व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों पर विचार रखा। वरिष्ठ पत्रकार एमएसए काजमी और अधिवक्ता रजिया बेग ने अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर बात की। वहीं आरपी विशाल और जबर सिंह ने दलित उत्पीड़न और सामाजिक भेदभाव से जुड़े मुद्दों को उठाया। अमन गुप्ता ने ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त करने और उन्हें समान अधिकार एवं अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया। पत्रकार त्रिलोचन भट्ट ने संवेदनशील सामाजिक मामलों की रिपोर्टिंग में मीडिया की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।

पर्यटन और तीर्थयात्रा प्रबंधन पर भी चर्चा

उत्तराखंड में लगातार बढ़ते पर्यटन और तीर्थयात्रा को लेकर भी जनसंवाद में सवाल उठे। अरण्य रंजन ने अनियंत्रित पर्यटन और तीर्थयात्रा के प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की। वक्ताओं ने पर्यटन विकास के साथ पर्यावरणीय क्षमता, स्थानीय संसाधनों और स्थानीय आबादी की जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं सरदार तेजिंदर सिंह ने किसानों से जुड़े उन मुद्दों को सामने रखा, जिनका समाधान अभी तक पूरी तरह नहीं हो पाया है। कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय आजीविका को मजबूत करने के लिए ठोस नीतियों की आवश्यकता पर चर्चा हुई।

संदीप दीक्षित बोले- यह किसी एक राजनीतिक दल का मंच नहीं

कार्यक्रम के मुख्य आयोजक और रचनात्मक कांग्रेस के मुख्य सारथी संदीप दीक्षित ने मंच के उद्देश्य को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह मंच किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि जनसंगठनों और आम नागरिकों की भागीदारी से राज्य के मुद्दों पर संवाद करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में कांग्रेस सत्ता में आती है, तब भी यह मंच जनता के मुद्दों को उठाता रहेगा और सरकार से सवाल करने का काम करेगा। उनके मुताबिक मंच का उद्देश्य किसी सरकार के पक्ष या विपक्ष में खड़ा होना नहीं, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों को सामने रखना है।

चुनाव से पहले साझा घोषणा पत्र तैयार करने का फैसला

जनसंवाद का एक प्रमुख निष्कर्ष यह रहा कि राज्य के विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों के सुझावों को एक साथ लाकर साझा घोषणा पत्र तैयार किया जाएगा। इसमें भू-कानून, पलायन, पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों, महिला अधिकार, सामाजिक न्याय, किसान, कुटीर उद्योग, पर्यटन और संस्कृति जैसे विषयों को शामिल किए जाने की बात कही गई। आयोजकों के अनुसार इसका उद्देश्य अलग-अलग संगठनों द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों को एक साझा दस्तावेज में शामिल करना है, ताकि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले जनता के सामने राज्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर एक व्यापक एजेंडा रखा जा सके।

कई सामाजिक और सार्वजनिक हस्तियों ने लिया हिस्सा

कार्यक्रम में उत्तराखंड इंसानियत मंच के डॉ. रवि चोपड़ा, उत्तराखंड महिला मंच की निर्मला बिष्ट और विमला कोली, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा, समाजसेवी सुरेश भाई, गरिमा दसौनी और सुजाता पॉल समेत कई लोगों ने भाग लिया और अपने सुझाव साझा किए।कार्यक्रम का संचालन रचनात्मक कांग्रेस के प्रदेश सारथी भुवन पाठक ने किया। जनसंवाद के समापन पर विभिन्न संगठनों ने उत्तराखंड से जुड़े मुद्दों पर आपसी समन्वय बढ़ाने और साझा तौर पर जनहित के विषयों को उठाने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही। अब इस आयोजन के दौरान सामने आए सुझावों को किस रूप में साझा घोषणा पत्र में शामिल किया जाता है, इस पर आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

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