उत्तराखंड में फार्मेसी दाखिलों पर काउंसिल का अलर्ट, मार्कशीट जांचे बिना एडमिशन देने वाले संस्थानों पर होगी कार्रवाई

उत्तराखंड में फार्मेसी पाठ्यक्रमों में दाखिले को लेकर एक अहम मामला सामने आया है। इंटरमीडिएट की अंकतालिका और विषयों की पात्रता की पर्याप्त जांच किए बिना छात्रों को फार्मेसी कोर्स में प्रवेश दिए जाने की शिकायतों के बाद उत्तराखंड फार्मेसी काउंसिल ने राज्य के सभी संबंधित शिक्षण संस्थानों को अलर्ट जारी किया है। काउंसिल ने प्रदेश के फार्मेसी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और पॉलीटेक्निक संस्थानों को निर्देश दिए हैं कि दाखिला देते समय अभ्यर्थियों की 12वीं की मार्कशीट और विषयों की अनिवार्य योग्यता की अच्छी तरह जांच की जाए। काउंसिल ने साफ किया है कि निर्धारित पात्रता पूरी नहीं करने वाले अभ्यर्थियों को प्रवेश दिए जाने की स्थिति में संबंधित संस्थान की जिम्मेदारी तय हो सकती है।

96 कॉलेजों समेत कई संस्थानों में संचालित हैं फार्मेसी कोर्स

उत्तराखंड में बड़ी संख्या में संस्थानों में फार्मेसी से जुड़े अलग-अलग पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक प्रदेश में 96 फार्मेसी कॉलेज, 24 विश्वविद्यालय और 21 पॉलीटेक्निक संस्थान डी.फार्मा, बी.फार्मा, फार्म डी और एम.फार्मा जैसे पाठ्यक्रम संचालित कर रहे हैं। इनमें डी.फार्मा की अवधि दो वर्ष, बी.फार्मा की चार वर्ष, फार्म डी की छह वर्ष और एम.फार्मा की अवधि दो वर्ष बताई गई है। ऐसे में प्रवेश प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थी की शैक्षिक योग्यता और संबंधित विषयों की अनिवार्य शर्तों की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या है फार्मेसी कोर्स में दाखिले की पात्रता?

काउंसिल के निर्देशों के अनुसार फार्मेसी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अभ्यर्थी का इंटरमीडिएट यानी 12वीं कक्षा में विज्ञान वर्ग से उत्तीर्ण होना जरूरी है। फिजिक्स, केमिस्ट्री के साथ निर्धारित विषय समूह में मैथ्स या बायोलॉजी से संबंधित पात्रता पूरी करना आवश्यक है। वहीं बी.फार्मा में प्रवेश के लिए विज्ञान वर्ग के अनिवार्य विषयों के साथ अंग्रेजी विषय में भी उत्तीर्ण होना जरूरी बताया गया है। इसका मतलब यह है कि केवल 12वीं पास होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अभ्यर्थी को संबंधित पाठ्यक्रम के लिए निर्धारित विषयों और परीक्षा परिणाम की शर्तें भी पूरी करनी होंगी।

मार्कशीट की जांच में लापरवाही से छात्रों को हो रही परेशानी

काउंसिल के सामने ऐसे मामले आने की बात कही गई है, जिनमें कुछ संस्थानों द्वारा निर्धारित पात्रता पूरी नहीं करने वाले अभ्यर्थियों को भी फार्मेसी पाठ्यक्रम में प्रवेश दिए जाने की शिकायतें सामने आईं। ऐसे मामलों में छात्र संस्थान में दाखिला लेकर निर्धारित अवधि तक पढ़ाई करते हैं और फीस भी जमा करते हैं। समस्या उस समय सामने आती है जब पढ़ाई पूरी करने के बाद वे फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकरण के लिए काउंसिल के पास पहुंचते हैं। यदि अभ्यर्थी ने प्रवेश के समय ही निर्धारित शैक्षिक पात्रता पूरी नहीं की थी, तो बाद में उसका पंजीकरण प्रभावित हो सकता है। इससे छात्रों के सामने पढ़ाई के बाद करियर और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है।

पढ़ाई और फीस के बाद सामने आता है पात्रता का विवाद

काउंसिल का कहना है कि दाखिले के समय यदि छात्र की अंकतालिका और विषयों की सही तरीके से जांच नहीं की जाती है तो इसका खामियाजा बाद में छात्र को भुगतना पड़ सकता है। कई मामलों में विद्यार्थी दो या चार साल की पढ़ाई पूरी करने के साथ बड़ी राशि फीस के रूप में खर्च कर देते हैं। इसके बाद रजिस्ट्रेशन के समय पात्रता से जुड़ी कमी सामने आने पर छात्र और संस्थान के बीच विवाद की स्थिति बन सकती है। ऐसे मामलों को लेकर कुछ अभ्यर्थियों द्वारा न्यायालय का रुख किए जाने की बात भी सामने आई है।

2026 के दाखिलों को लेकर काउंसिल ने फिर चेताया

उत्तराखंड फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार के.एस. फरस्वाण के अनुसार, संस्थानों को इससे पहले भी पत्रों और समाचार पत्रों के माध्यम से प्रवेश प्रक्रिया में पात्रता की जांच को लेकर निर्देश दिए जा चुके हैं। अब शैक्षणिक सत्र 2026 में होने वाले दाखिलों को लेकर काउंसिल ने संस्थानों को दोबारा सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। काउंसिल ने कहा है कि प्रवेश देने से पहले प्रत्येक अभ्यर्थी की अंकतालिका और संबंधित विषयों की पात्रता की पूरी तरह जांच की जाए।

संस्थानों की जिम्मेदारी तय करने के संकेत

काउंसिल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी ऐसे अभ्यर्थी को प्रवेश दे दिया जाता है जो निर्धारित पात्रता पूरी नहीं करता, तो भविष्य में रजिस्ट्रेशन के समय समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसलिए कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों को प्रवेश प्रक्रिया के दौरान केवल दस्तावेज जमा करने तक सीमित न रहते हुए उनकी वास्तविक पात्रता का सत्यापन करने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। काउंसिल का यह अलर्ट उन छात्रों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो 2026 में डी.फार्मा, बी.फार्मा या अन्य फार्मेसी पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने की तैयारी कर रहे हैं। अभ्यर्थियों के लिए भी जरूरी है कि वे फीस जमा करने या प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने से पहले संबंधित पाठ्यक्रम की पात्रता स्वयं जांच लें, ताकि बाद में रजिस्ट्रेशन को लेकर किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

छात्रों को भी दाखिले से पहले दस्तावेज जांचने की सलाह

फार्मेसी में करियर बनाने की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रवेश के समय हुई छोटी सी चूक का असर पढ़ाई पूरी होने के बाद पंजीकरण की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। ऐसे में छात्रों को चाहिए कि वे संबंधित कॉलेज में प्रवेश लेने से पहले 12वीं की मार्कशीट, विषयों की पात्रता और संबंधित फार्मेसी कोर्स के प्रवेश नियमों की पुष्टि करें। वहीं संस्थानों की जिम्मेदारी है कि पात्रता पूरी करने वाले अभ्यर्थियों को ही नियमानुसार प्रवेश दिया जाए।

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