उत्तराखंड छात्रसंघ चुनाव के नतीजों ने बढ़ाई सियासी हलचल, कई कॉलेजों में NSUI-निर्दलीयों का दबदबा तो ABVP ने भी जमाया प्रभाव
देहरादून: उत्तराखंड में 29 सितंबर को हुए छात्रसंघ चुनावों के नतीजों के बाद प्रदेश की छात्र राजनीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। राज्य के अलग-अलग महाविद्यालयों और विश्वविद्यालय परिसरों में हुए चुनावों में ABVP, NSUI के साथ-साथ निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी कई महत्वपूर्ण पदों पर जीत दर्ज की। छात्रसंघ चुनाव भले ही सीधे तौर पर विधानसभा चुनाव नहीं होते, लेकिन उत्तराखंड की छात्र राजनीति में इनका अपना महत्व रहा है। इस बार भी कई कॉलेजों में मुकाबला सीधे ABVP और NSUI के बीच रहा, जबकि कुछ स्थानों पर बागी या निर्दलीय प्रत्याशियों ने दोनों संगठनों के अधिकृत उम्मीदवारों को चुनौती दी। ताजा उपलब्ध परिणामों में देहरादून के DAV PG College में ABVP के नवदीप राणा ने अध्यक्ष पद जीता, जबकि DBS PG College में NSUI के अभिनव कफालिया अध्यक्ष निर्वाचित हुए। वहीं कुमाऊं विश्वविद्यालय के DSB परिसर में निर्दलीय भानु प्रताप सिंह चौहान ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की।
एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी में निर्दलीय उम्मीदवार ने बनाई बढ़त
हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज का चुनाव इस बार सबसे अधिक चर्चित मुकाबलों में रहा। यहां अध्यक्ष पद के लिए ABVP के धीरज बिष्ट, NSUI के मेहुल शाह और निर्दलीय आर्यन बेलवाल के बीच मुकाबला हुआ। मतगणना के दौरान आर्यन बेलवाल बढ़त बनाए हुए थे और कॉलेज परिसर में हंगामे की स्थिति भी बनी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक आर्यन बेलवाल ने ABVP से टिकट की दावेदारी की थी, लेकिन अधिकृत प्रत्याशी घोषित होने के बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। एमबीपीजी में कुल 12,800 विद्यार्थी मतदान के लिए पंजीकृत थे, जिनमें 4,063 ने मतदान किया। यहां मतगणना 18 चरणों में हुई, इसलिए शुरुआती चरणों के आंकड़ों को अंतिम परिणाम से अलग देखना जरूरी है।
डीएसबी परिसर में निर्दलीय प्रत्याशी की लगातार दूसरी जीत
नैनीताल स्थित कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर में अध्यक्ष पद पर निर्दलीय भानु प्रताप सिंह चौहान ने जीत दर्ज की। उन्हें 1,355 मत मिले, जबकि ABVP के शुभम कुमार को 873 वोट प्राप्त हुए। भानु प्रताप सिंह चौहान ने 482 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, डीएसबी परिसर में लगातार दूसरे वर्ष निर्दलीय प्रत्याशी ने अध्यक्ष पद पर कब्जा किया है। यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि यहां अध्यक्ष पद के अलावा कई अन्य पदों पर भी निर्विरोध निर्वाचन पहले ही हो चुका था।
देहरादून के DAV में ABVP की जीत
राजधानी देहरादून के DAV PG College में अध्यक्ष पद पर ABVP के नवदीप राणा विजयी रहे। उन्होंने NSUI के सौरभ सेमवाल को पीछे छोड़ा। DAV में अध्यक्ष पद का मुकाबला बहुकोणीय था। यहां कई प्रत्याशियों के मैदान में होने के कारण चुनावी मुकाबला केवल दो छात्र संगठनों तक सीमित नहीं रहा। अन्य पदों पर भी अलग-अलग छात्र संगठनों और निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की।
DBS कॉलेज में NSUI ने दर्ज की जीत
देहरादून के DBS PG College में NSUI के अभिनव कफालिया ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की। उपलब्ध परिणामों के अनुसार उन्हें 643 मत मिले, जबकि ABVP के अभिषेक नेगी को 549 वोट मिले। इस तरह राजधानी के दो प्रमुख कॉलेजों—DAV और DBS—में अध्यक्ष पद के नतीजे अलग-अलग रहे। एक जगह ABVP और दूसरी जगह NSUI प्रत्याशी विजयी हुआ।
बालगंगा महाविद्यालय में NSUI की प्रियांशी तिवारी विजयी
टिहरी जिले के बालगंगा महाविद्यालय सेंदुल केमरा में अध्यक्ष पद पर NSUI की प्रियांशी तिवारी ने जीत दर्ज की। उन्होंने ABVP के सुजल को 62 मतों के अंतर से हराया। प्रियांशी तिवारी को 237 मत मिले, जबकि सुजल के खाते में 175 वोट आए। 47 मत निरस्त किए गए। अध्यक्ष पद को छोड़कर कॉलेज के छह अन्य पदों पर NSUI प्रत्याशी पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके थे।
चमोली के कर्णप्रयाग और नारायणबगड़ में NSUI की जीत
चमोली जिले में भी कई कॉलेजों में मुकाबले के परिणाम NSUI के पक्ष में रहे। कर्णप्रयाग के डॉ. शिवानंद नौटियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में NSUI के सुनील रावत अध्यक्ष निर्वाचित हुए। उन्होंने 76 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। वहीं नारायणबगड़ के मगनलाल शाह राजकीय महाविद्यालय में NSUI के हिमांशु नेगी अध्यक्ष बने। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार वहां NSUI ने प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की। दूसरी ओर गैरसैंण में ABVP के नरेश सिंह ने अध्यक्ष पद हासिल किया।
नरेंद्रनगर में भी NSUI का प्रदर्शन
नरेंद्रनगर राजकीय महाविद्यालय में अध्यक्ष पद पर NSUI के आयुष रावत ने जीत दर्ज की। उन्होंने ABVP के हिमांशु जोशी को 69 मतों से हराया। यहां उपाध्यक्ष सहित अन्य प्रमुख पदों पर भी NSUI समर्थित प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की।
रामनगर में निर्दलीय नीरज कंडारी की जीत
रामनगर के पीएनजी पीजी कॉलेज में अध्यक्ष पद का मुकाबला भी दिलचस्प रहा। यहां ABVP से जुड़े रहे नीरज कंडारी ने टिकट न मिलने के बाद निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक नीरज कंडारी को 738 वोट मिले, जबकि NSUI के सूरज रावत को 733 वोट प्राप्त हुए। ABVP की अधिकृत प्रत्याशी विशाखा चौहान को 383 वोट मिले। इस तरह अध्यक्ष पद का फैसला महज 5 मतों के अंतर से हुआ।
मसूरी में ABVP के वेदांत थापली अध्यक्ष
मसूरी के एमपीजी कॉलेज में अध्यक्ष पद पर ABVP के वेदांत थापली ने जीत दर्ज की। उपलब्ध परिणामों के अनुसार वेदांत थापली को 185 मत मिले, जबकि NSUI के विकास सिंह को 48 और अन्य प्रत्याशी को 36 वोट प्राप्त हुए। इस कॉलेज में चुनाव से पहले नामांकन को लेकर भी विवाद और हंगामे की स्थिति सामने आई थी।
गढ़वाल और कुमाऊं में अलग-अलग तस्वीर
छात्रसंघ चुनावों के परिणामों को एक नजर में देखने पर यह सामने आता है कि पूरे उत्तराखंड में किसी एक छात्र संगठन की एकसमान तस्वीर नहीं बनी है। गढ़वाल के कई कॉलेजों में ABVP ने प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की, जबकि कुछ अन्य संस्थानों में NSUI और निर्दलीय प्रत्याशी सफल रहे। हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक गढ़वाल मंडल के 55 डिग्री कॉलेजों में 23 कॉलेजों के अध्यक्ष पद ABVP प्रत्याशियों ने जीते। वहीं कुमाऊं क्षेत्र में भी अलग-अलग परिणाम सामने आए। कई जगह ABVP ने जीत हासिल की, जबकि कुछ महत्वपूर्ण परिसरों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने अध्यक्ष पद अपने नाम किया।
ABVP के खाते में भी कई अहम जीत
छात्रसंघ चुनावों को केवल NSUI या निर्दलीय प्रत्याशियों की सफलता के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। प्रदेश के कई कॉलेजों में ABVP ने अध्यक्ष समेत अन्य प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की। देहरादून के DAV PG College, मसूरी के MPG College, खटीमा, लोहाघाट और कई अन्य स्थानों से ABVP समर्थित प्रत्याशियों की जीत की जानकारी सामने आई है। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 110 से अधिक महाविद्यालयों में ABVP प्रत्याशियों ने अध्यक्ष, महासचिव या अन्य प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की।
छात्रसंघ चुनावों में निर्दलीयों की भी मजबूत मौजूदगी
इस बार कई कॉलेजों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी दोनों प्रमुख छात्र संगठनों को चुनौती दी। DSB परिसर में भानु प्रताप सिंह चौहान की जीत और रामनगर में नीरज कंडारी की जीत इसके प्रमुख उदाहरण हैं। ऐसे परिणाम बताते हैं कि कई कॉलेजों में छात्र मतदाताओं के सामने विकल्प केवल ABVP और NSUI तक सीमित नहीं रहे। स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ और संगठन से अलग चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की भूमिका भी कई मुकाबलों में दिखाई दी।
क्या इन नतीजों का असर बड़ी राजनीति पर पड़ेगा?
छात्रसंघ चुनावों के बाद राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों के बीच चर्चा जरूर तेज हुई है, लेकिन इन परिणामों को सीधे विधानसभा या लोकसभा चुनावों का संकेत मानना उचित नहीं होगा। छात्रसंघ चुनावों का दायरा, मतदाता वर्ग और स्थानीय मुद्दे अलग होते हैं। फिलहाल इतना जरूर है कि 29 सितंबर के चुनाव परिणामों ने उत्तराखंड के कॉलेज परिसरों में ABVP, NSUI और निर्दलीय छात्र राजनीति—तीनों की मौजूदगी को सामने रखा है। अलग-अलग कॉलेजों के परिणामों में अंतर यह भी दिखाता है कि स्थानीय स्तर पर मुकाबले की तस्वीर एक जैसी नहीं रही। आने वाले दिनों में छात्र संगठनों के साथ-साथ राजनीतिक दल भी इन परिणामों का अपने-अपने तरीके से विश्लेषण कर सकते हैं। लेकिन किसी बड़े चुनाव पर इनके संभावित प्रभाव को लेकर निष्कर्ष निकालने से पहले व्यापक और अलग तरह के चुनावी आंकड़ों को देखना जरूरी होगा।
