जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर ट्रस्ट के CEO, जानिए उनका सैन्य करियर और नई भूमिका

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अयोध्या:-  श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नवनियुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा गुरुवार को अयोध्या पहुंचे। उन्होंने कारसेवकपुरम स्थित ट्रस्ट कार्यालय में महासचिव गोविंद देवगिरी, कोषाध्यक्ष महेश भागचंदका और ट्रस्ट सदस्य मदन मोहन पांडेय से मुलाकात की। इसके बाद कोषाध्यक्ष की मौजूदगी में उन्होंने औपचारिक रूप से CEO का पदभार ग्रहण किया। महासचिव गोविंद देवगिरी ने उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।

पहले कुछ दिन ट्रस्ट की व्यवस्थाओं को समझेंगे

कार्यभार संभालने के बाद जितेंद्र मिश्रा ने बताया कि उनकी पहली बैठक हुई है, जिसमें ट्रस्ट के पदाधिकारियों और सदस्यों से परिचय हुआ। उन्होंने कहा कि शुरुआती चार से पांच दिन वह ट्रस्ट के कामकाज, व्यवस्थाओं और अलग-अलग जिम्मेदारियों को समझने में लगाएंगे। इसके बाद वह पूरी तरह से अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे। जितेंद्र मिश्रा ने अपने जीवन के सफर का जिक्र करते हुए कहा कि वह 17 वर्ष की उम्र में देवरिया स्थित अपने गांव से निकले थे और करीब छह दशकों तक देश की सेवा की। अब उन्हें भगवान श्रीराम ने राम मंदिर और राम भक्तों की सेवा करने का अवसर दिया है। उन्होंने इस जिम्मेदारी को अपने लिए सौभाग्य बताते हुए पूरी निष्ठा से दायित्व निभाने की बात कही।

छह दिसंबर 1986 को वायुसेना में हुए थे शामिल

मूल रूप से देवरिया जिले के भाटपाररानी क्षेत्र के भोपतपुरा गांव निवासी जितेंद्र मिश्रा ने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के तौर पर कमीशन प्राप्त किया था। अप्रैल 2026 में वह वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए। अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने 18 से अधिक प्रकार के विमानों पर उड़ान भरी और करीब 3,000 घंटे से ज्यादा का उड़ान अनुभव हासिल किया। वह भारतीय वायुसेना में कमांडिंग-इन-चीफ जैसे अहम पदों पर भी रहे। इसके अलावा एकीकृत रक्षा स्टाफ में उप प्रमुख (सिद्धांत, संगठन एवं प्रशिक्षण) की जिम्मेदारी भी संभाली।

कारगिल युद्ध में निभाई अहम भूमिका

जितेंद्र मिश्रा का सैन्य करियर कई महत्वपूर्ण अभियानों से जुड़ा रहा है। कारगिल युद्ध के दौरान स्क्वाड्रन लीडर के रूप में उन्होंने मिराज-2000 विमान से लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बाद में ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ के दौरान इन्हीं हथियारों का इस्तेमाल टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर पाकिस्तानी घुसपैठियों के खिलाफ सटीक हमलों में किया गया।

उन्होंने भारत के अलावा अमेरिका और ब्रिटेन के प्रतिष्ठित रक्षा संस्थानों से प्रशिक्षण भी हासिल किया है। बड़े संगठनों के नेतृत्व, संचालन और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का उन्हें व्यापक अनुभव रहा है।

वेस्टर्न एयर कमांड की संभाली थी कमान

1 जनवरी 2025 को जितेंद्र मिश्रा ने भारतीय वायुसेना की वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख का पद संभाला था। यह वायुसेना की महत्वपूर्ण कमानों में शामिल है और देश के संवेदनशील पश्चिमी तथा उत्तरी हवाई क्षेत्रों की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालती है।

उनके नेतृत्व में ऑपरेशन सिंदूर को भी महत्वपूर्ण सफलता मिली। सैन्य सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से सम्मानित किया जा चुका है।

अब सेवानिवृत्ति के बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के CEO के रूप में उनकी नई जिम्मेदारी शुरू हुई है। माना जा रहा है कि उनके सैन्य नेतृत्व और प्रशासनिक अनुभव का इस्तेमाल राम मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं, संचालन और विभिन्न स्तरों के समन्वय को और बेहतर बनाने में किया जाएगा।

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