Uttarakhand Bamboo Plantation: हाईवे किनारे बांस से रुकेगा मिट्टी का कटाव, रोजगार भी बढ़ेगा
देहरादून:- उत्तराखंड में एक्सप्रेसवे और हाईवे के किनारे अब बांस के पौधों की हरियाली नजर आ सकती है। बारिश के दौरान होने वाले मिट्टी के कटाव और भूस्खलन की समस्या को कम करने के उद्देश्य से उत्तराखंड बांस एवं फाइबर विकास बोर्ड ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सड़क किनारे बांस लगाने का प्रस्ताव भेजा है। इस पहल से एक ओर सड़क किनारे मिट्टी को मजबूती मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर हरियाली बढ़ने से पर्यावरण को फायदा होगा। अधिकारियों का मानना है कि बांस के झुरमुट वाहनों से होने वाले शोर को कम करने और सड़क किनारे हरित क्षेत्र विकसित करने में भी मददगार हो सकते हैं।
हाईवे किनारे स्थानीय प्रजाति का बांस लगाने का सुझाव
बोर्ड की ओर से एक्सप्रेसवे और हाईवे के किनारे स्थानीय प्रजातियों के बांस लगाने का सुझाव दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक बांस की जड़ें मिट्टी को मजबूती से बांधने में मदद करती हैं और करीब दो से तीन वर्षों में पौधे मिट्टी पर मजबूत पकड़ बना सकते हैं। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मानसून के दौरान तेज बारिश से सड़क किनारे मिट्टी बहने और भूस्खलन की घटनाएं सामने आती रहती हैं। कई बार मिट्टी के लगातार कटाव के कारण सड़क का किनारा कमजोर होकर धंसने लगता है, जिससे यातायात और सड़क सुरक्षा पर भी असर पड़ता है। ऐसे में सड़क किनारे बांस का पौधरोपण मिट्टी के बहाव को नियंत्रित करने में उपयोगी साबित हो सकता है। बांस की जड़ें मिट्टी को बांधे रखने के साथ ढलान वाले क्षेत्रों में कटाव का प्रभाव कम करने में मदद कर सकती हैं।
पशु-पक्षियों के लिए भी बनेगा अनुकूल वातावरण
बांस के झुरमुट केवल मिट्टी संरक्षण तक सीमित नहीं रहेंगे। इनके विकसित होने के बाद सड़क किनारे हरित पट्टी तैयार हो सकती है, जो पशु-पक्षियों के लिए भी अनुकूल वातावरण उपलब्ध करा सकती है। इसके अलावा हाईवे के किनारे बढ़ने वाली हरियाली से सड़क के आसपास का प्राकृतिक स्वरूप बेहतर होने और पर्यावरणीय संतुलन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
‘ग्रीन गोल्ड’ से रोजगार के अवसर भी
बांस को तेजी से बढ़ने वाला पौधा माना जाता है और इसे कई स्थानों पर ‘ग्रीन गोल्ड’ के नाम से भी जाना जाता है। इसकी एक खासियत यह है कि कटाई के बाद भी बांस दोबारा तेजी से विकसित हो सकता है। इस वजह से इससे लंबे समय तक उत्पादन लिया जा सकता है। बांस की खेती, पौधों की देखरेख और इससे जुड़े कार्यों के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी विकसित किए जा सकते हैं। ऐसे में प्रस्तावित योजना को पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी उपयोगी माना जा रहा है।
NHAI की सहमति के बाद आगे बढ़ेगी योजना
उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी मीनाक्षी जोशी के मुताबिक, यदि एक्सप्रेसवे के किनारे बांस लगाने के प्रस्ताव को NHAI की मंजूरी मिलती है तो इससे मिट्टी के कटाव को नियंत्रित करने के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। अब NHAI की सहमति के बाद इस प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।

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