कोर्ट की कार्यवाही वायरल करने वालों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती - Uttarakhand Samachar

सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की कार्यवाही के ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अब न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग को बिना पूर्व अनुमति के सोशल मीडिया या किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट, री-पोस्ट, एडिट या अपलोड नहीं किया जा सकेगा। इस आदेश का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखना और रिकॉर्डिंग के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाना है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के लिए संबंधित महासचिव और हाईकोर्ट की कार्यवाही के लिए संबंधित रजिस्ट्रार जनरल की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी। बिना अनुमति किसी भी प्रकार की रिकॉर्डिंग साझा करना या उसमें बदलाव करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह मामला अदालत की लाइव स्ट्रीमिंग और न्यायिक कार्यवाही के वीडियो क्लिप्स को सोशल मीडिया पर संदर्भ से हटाकर या भ्रामक तरीके से प्रसारित किए जाने की शिकायतों से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश और उचित व्यवस्था बनाना आवश्यक है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने दलील दी कि अदालत की कार्यवाही के वीडियो को एडिट कर सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया की गलत तस्वीर पेश होती है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी इस चिंता से सहमति जताते हुए कहा कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए स्पष्ट नियम और नियंत्रण जरूरी हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश को न्यायिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब मामले की अगली सुनवाई में केंद्र सरकार और अन्य पक्षों के जवाब के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

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