तीक्ष्ण सूद बने विरोध का चेहरा, जिला अध्यक्ष विवाद ने बढ़ाई मुश्किलें

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पंजाब भाजपा में हाल ही में हुए संगठनात्मक फेरबदल के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। तीन अगस्त को प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों द्वारा नई प्रदेश कार्यकारिणी और जिला अध्यक्षों की घोषणा के बाद कई पुराने और वैचारिक नेताओं ने फैसलों पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि वर्षों तक संगठन के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है, जबकि हाल के वर्षों में दूसरी पार्टियों से जुड़े नेताओं को प्रमुख जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। नई टीम की घोषणा के कुछ समय बाद ही तीन दशक से अधिक समय तक भाजपा से जुड़े वरिष्ठ नेता सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने फैसले को सिद्धांतों की लड़ाई बताते हुए कहा कि संगठन में समर्पित और वैचारिक कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान नहीं मिल रहा। उनके इस्तीफे ने पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी को और अधिक उजागर कर दिया।

सबसे बड़ा विवाद होशियारपुर में जिला अध्यक्ष पद को लेकर सामने आया। पहले सतीश बावा को शहरी जिला अध्यक्ष बनाया गया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उनकी जगह नितिन गुप्ता नन्नू को जिम्मेदारी सौंप दी गई। इस फैसले का पूर्व कैबिनेट मंत्री तीक्ष्ण सूद ने खुलकर विरोध किया। उनके समर्थन में 111 पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने अपने संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद तीक्ष्ण सूद नाराज नेताओं के सबसे प्रमुख चेहरे बनकर उभरे हैं। पार्टी के कई पुराने नेताओं का कहना है कि संगठनात्मक नियुक्तियों में स्थानीय कार्यकर्ताओं और जिला इकाइयों से पर्याप्त सलाह-मशविरा नहीं किया जा रहा। उनका आरोप है कि फैसलों में जमीनी संगठन की बजाय राजनीतिक समीकरणों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं में निराशा बढ़ रही है।

कुछ नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के राजनीतिक अतीत को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पार्टी के कठिन दौर में संगठन को मजबूत करने वाले कार्यकर्ताओं की तुलना में दूसरी पार्टियों से आए नेताओं को अधिक महत्व दिया जा रहा है। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित हो रहा है और संगठन के भीतर असंतोष बढ़ता जा रहा है। भाजपा के पुराने संगठनात्मक चेहरों में मनोरंजन कालिया, अविनाश राय खन्ना, लक्ष्मीकांता चावला, अश्वनी शर्मा, विजय सांपला, सोम प्रकाश, मदन मोहन मित्तल, जीवन गर्ग और मास्टर मोहन लाल जैसे नेताओं का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का मानना है कि इन नेताओं ने वर्षों की मेहनत से पंजाब में भाजपा का आधार मजबूत किया और संगठन को विस्तार दिया। पार्टी के असंतुष्ट नेताओं का कहना है कि यदि समय रहते कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर नहीं की गई और संगठनात्मक फैसलों में पारदर्शिता नहीं लाई गई, तो इसका असर आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर भी पड़ सकता है। हालांकि भाजपा नेतृत्व की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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