विधानसभा भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट में विधानसभा अध्यक्ष की बड़ी जीत

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विधानसभा में भर्तियों को लेकर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी की बड़ी जीत हुई है जी हां मीडिया द्वारा विधानसभा की भर्ती पर सवाल खड़े किए जाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने बड़ा फैसला लेते हुए 2016 के बाद के तमाम भर्ती विधानसभा के कर्मचारियों की भर्ती निरस्त कर दी थी जिसके बाद मामला न्यायालय में चला गया हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट में भी बर्खास्त कर्मचारियों ने मुंह की खाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों के विशेष याचिका को निरस्त कर दिया। बता दें कि इससे पहले नैनीताल हाईकोर्ट ने भी विधानसभा कर्मचारियों को बर्खास्त करने के विधानसभा सचिवालय के आदेश को सही ठहराया था। बर्खास्त कर्मचारियों की ओर से दायर विशेष अनुग्रह याचिका (एसएलपी) को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इससे बर्खास्त कर्मचारियों को झटका लगा है।

उत्तराखंड विधानसभा में नियमों के विरोध तदर्थ नियुक्तियों के संबंध में आज उच्चतम न्यायालय ने पुनः उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण के फैसले को सही ठहराते हुए बर्खास्त कर्मचारियों द्वारा दाखिल याचिका को मात्र डेढ़ मिनट की सुनवाई में निरस्त कर दिया।उत्तराखंड विधानसभा सचिवालय की ओर से पैरवी कर रहे वकील अमित तिवारी ने बताया की वर्ष 2021 में विधानसभा में तदर्थ रूप से नियुक्त हुए 72 कर्मचारियों द्वारा दाखिल की गई। याचिका (एसएलपी) को आज उच्चतम न्यायालय की डबल बेंच के न्यायधीश हृषिकेश रॉय और न्यायधीश मनोज मिश्रा द्वारा सुना गया जिसमे डबल बेंच ने मात्र डेढ़ मिनट में ही याचिकाकर्ताओं की याचिका को निरस्त कर दिया और उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण के द्वारा लिए गए फैसले को सही ठहराया।

आपको बता दें कि विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने नियम विरूद्ध तदर्थ नियुक्तियों के खिलाफ सख्त कदम उठाया था। जिसमें 2016 से 2021 में तदर्थ आधार पर नियुक्त 228 कर्मचारियों की विशेषज्ञ जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सेवाएं समाप्त की गई।भविष्य में विधानसभा सचिवालय में होने वाली नियुक्तियां नियम व पारदर्शिता हो इसके लिए स्पीकर ने नियमावली में संशोधन की पहल की थी।

उत्तराखंड विधानसभा अब सीधी भर्ती के सभी खाली पदों को उत्तराखंड राज्य लोक सेवा आयोग और उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से भरेगी। इस संशोधन के साथ शासन ने सेवा नियमावली पर सहमति जताते हुए इसे विधानसभा को लौटा दिया है। संशोधित नियमावली में विधायी को फिर से विधानसभा का प्रशासकीय विभाग बनाने का प्रावधान किया गया है।उच्चतम न्यायालय में विधानसभा सचिवालय उत्तराखंड की ओर से वकील अमित तिवारी और वकील अर्जुन गर्ग ने पैरवी की।
वहीं विधानसभा अध्यक्ष अध्यक्ष रितु खंडूरी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया है।

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