रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू को हाईकोर्ट से झटका, FIR रद्द करने की याचिका खारिज; गंभीर आरोपों की होगी जांच - Uttarakhand Samachar

रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू को हाईकोर्ट से झटका, FIR रद्द करने की याचिका खारिज; गंभीर आरोपों की होगी जांच

उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू से जुड़े विवाद में नैनीताल हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने गिरधारी लाल साहू की ओर से दायर उस रिट याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उनके खिलाफ देहरादून के कैंट थाने में दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग की गई थी। इस फैसले के बाद अब मामले में दर्ज मुकदमे की जांच जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है।

गिरधारी लाल साहू ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर एफआईआर को चुनौती दी थी। उनका पक्ष था कि दोनों की शादी 6 जुलाई 2004 को हुई थी और वे करीब 22 वर्षों से वैवाहिक संबंध में हैं। याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत में दलील दी कि यह मूल रूप से पारिवारिक और वैवाहिक विवाद है, जिसे आपराधिक मुकदमे का रूप दिया जा रहा है। इसलिए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द किया जाना चाहिए।

रेखा आर्या ने लगाए थे कई गंभीर आरोप

दूसरी ओर, रेखा आर्या की शिकायत में गिरधारी लाल साहू पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के मुताबिक, शादी के समय उनसे अपनी पहली शादी और बच्चों से जुड़ी जानकारी छिपाई गई थी। इसके अलावा, अन्य महिलाओं से कथित संबंधों का विरोध करने पर मारपीट, गाली-गलौज और जातिसूचक अपमान किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।

शिकायत में कंपनी के निदेशक पद से हटाए जाने को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रेखा आर्या का आरोप है कि उनके फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों का इस्तेमाल करके उन्हें कंपनी के निदेशक पद से जबरन सेवानिवृत्त दिखाया गया, जबकि उन्होंने अपनी ओर से कोई इस्तीफा नहीं दिया था। हत्या की साजिश से जुड़ी ऑडियो रिकॉर्डिंग का भी जिक्र

इस मामले में सबसे गंभीर आरोप कथित तौर पर जान से मारने की साजिश से जुड़ा है। रेखा आर्या ने अपनी शिकायत में एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का हवाला दिया है। उनका आरोप है कि इस रिकॉर्डिंग में गिरधारी लाल साहू उन्हें रास्ते से हटाने और इसके लिए पैसे खर्च करने की बात करते सुनाई देते हैं।

हालांकि, इस ऑडियो रिकॉर्डिंग और कथित दस्तावेजों की सत्यता को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता और रेखा आर्या के वकील ने भी याचिका का विरोध करते हुए आरोपों की गंभीरता का हवाला दिया। उन्होंने यह भी दलील दी कि याचिकाकर्ता जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहे हैं।

हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आलोक महरा की अदालत में हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद अदालत ने माना कि एफआईआर में लगाए गए आरोप केवल सामान्य वैवाहिक विवाद या आपसी मनमुटाव तक सीमित नहीं हैं। अदालत के सामने शारीरिक प्रताड़ना, कथित जालसाजी, जातिसूचक अपमान और जान से मारने की साजिश जैसे गंभीर संज्ञेय अपराधों से जुड़े आरोप रखे गए थे। कोर्ट ने माना कि इन आरोपों की वास्तविकता का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच और साक्ष्यों का परीक्षण जरूरी है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पति-पत्नी के बीच लंबे समय से वैवाहिक संबंध बने रहने का मतलब यह नहीं है कि बाद में कथित तौर पर हुई प्रताड़ना या अन्य अपराधों की संभावना को खारिज कर दिया जाए। इसी तरह, ऑडियो रिकॉर्डिंग और कथित फर्जी दस्तावेजों की प्रामाणिकता भी जांच और मुकदमे के दौरान तय होने का विषय है। इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने एफआईआर को निरस्त करने का कोई पर्याप्त आधार नहीं पाया और गिरधारी लाल साहू की रिट याचिका खारिज कर दी।

अब आगे क्या होगा?

हाईकोर्ट के इस फैसले का मतलब है कि फिलहाल गिरधारी लाल साहू के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द नहीं होगी। मामले में लगाए गए आरोपों की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकेगी। हालांकि, अदालत का यह फैसला आरोपों को दोषसिद्धि के रूप में स्थापित नहीं करता। मामले में अंतिम जिम्मेदारी और आरोपों की सत्यता का निर्धारण साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

फिलहाल हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद रेखा आर्या और गिरधारी लाल साहू से जुड़ा मामला एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति और कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

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