मधेपुरा:- सावन की अंतिम सोमवारी पर बिहार के प्रसिद्ध सिंहेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच भगदड़ और बैरिकेडिंग टूटने की खबरों को लेकर जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। मधेपुरा के जिलाधिकारी अभिषेक रंजन ने कहा कि मंदिर परिसर में भगदड़ जैसी कोई घटना नहीं हुई और श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लगाई गई लोहे की बैरिकेडिंग भी पूरी तरह सुरक्षित रही। जिलाधिकारी के अनुसार, सुबह करीब 6 से 7 बजे के बीच मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बढ़ गई थी। इसके बाद प्रशासन ने निर्धारित एसओपी के तहत मुख्य प्रवेश द्वार को बीच-बीच में बंद कर श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित किया। मंदिर के बाहर पर्याप्त स्थान होने के कारण लोगों को वहां व्यवस्थित तरीके से फैलाया गया और भीड़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी गई। डिहाइड्रेशन से कुछ श्रद्धालुओं की बिगड़ी तबीयत डीएम अभिषेक रंजन ने बताया कि भीड़ के दौरान कुछ श्रद्धालु डिहाइड्रेशन के कारण अस्वस्थ हो गए थे। मंदिर परिसर में पहले से बनाए गए मेडिकल कैंप में उन्हें तत्काल उपचार दिया गया। इसके अलावा सीढ़ियों पर पैर फिसलने और बैरिकेडिंग में पैर फंसने से एक-दो श्रद्धालुओं को हल्की चोटें आईं, जिनका मौके पर ही इलाज कराया गया। प्रशासन के अनुसार, इन घटनाओं के बावजूद किसी बड़े हादसे की स्थिति नहीं बनी और श्रद्धालुओं के जलाभिषेक की व्यवस्था सुरक्षित तरीके से जारी रही। एसपी बोले- न मची भगदड़, न टूटी बैरिकेडिंग मधेपुरा के एसपी संदीप सिंह ने भी भगदड़ और बैरिकेडिंग टूटने की खबरों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में न तो भगदड़ मची और न ही कहीं बैरिकेडिंग क्षतिग्रस्त हुई। एसपी के मुताबिक, जब श्रद्धालुओं की संख्या अधिक हो जाती है तो सुरक्षा व्यवस्था के तहत मुख्य गेट को कुछ समय के लिए बंद कर लोगों को कतारों में व्यवस्थित किया जाता है। अंतिम सोमवारी पर भी प्रशासन और पुलिस ने इसी निर्धारित प्रक्रिया के तहत भीड़ को नियंत्रित किया। उन्होंने बताया कि भीड़ के दौरान एक महिला के फिसलने से उसके सिर में सतही चोट आई थी, जिसका उपचार कराया गया। वहीं, ड्यूटी के दौरान एक पुलिसकर्मी के पैर में मोच आ गई, जिसके बाद उसे भी इलाज के लिए भेजा गया। तीन वर्षों से एसओपी के तहत मेडिकल और सुरक्षा व्यवस्था एसपी संदीप सिंह ने बताया कि सिंहेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए पिछले तीन वर्षों से निर्धारित एसओपी के तहत एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और मेडिकल कैंप की व्यवस्था की जा रही है। अंतिम सोमवारी पर भी ये सभी इंतजाम सक्रिय रखे गए थे। मेडिकल कैंप में अस्वस्थ होने वाले श्रद्धालुओं को तत्काल प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके साथ ही प्रशासन और पुलिस की टीमें मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में भीड़ की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रहीं। अफवाहों से बचने और आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील एसपी ने मीडिया संस्थानों, न्यूज पोर्टल और यूट्यूबर्स से अपील की कि किसी भी घटना से जुड़ी खबर प्रसारित करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें। उन्होंने बिना पुष्टि के भ्रामक या अफवाह आधारित खबरें प्रसारित नहीं करने की बात कही। वहीं, जिलाधिकारी और पुलिस प्रशासन ने श्रद्धालुओं एवं आम लोगों से सिंहेश्वर मंदिर की व्यवस्था या किसी घटना से संबंधित जानकारी के लिए केवल प्रशासन और पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से जारी सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि बिना पुष्टि की खबरें और अफवाहें लोगों के बीच अनावश्यक भ्रम पैदा कर सकती हैं। प्रशासन के अनुसार, सावन की अंतिम सोमवारी पर बढ़ी श्रद्धालुओं की भीड़ को निर्धारित एसओपी के तहत नियंत्रित किया गया और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। Please follow and like us: Share Post Share Post navigation नरेंद्र मोदी के मंदिर पर बड़ा दावा, 112 करोड़ की लागत और सोने की प्रतिमा का जिक्र Himachal Accident News: ऊना में श्रद्धालुओं से भरा वाहन दुर्घटनाग्रस्त, बड़ी संख्या में घायल