UP Contract Teachers: नियमितीकरण को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा सवाल, सरकार से मांगा जवाब - Uttarakhand Samachar

लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लंबे समय से संविदा पर सेवाएं दे रहे शिक्षकों के भविष्य को लेकर अहम टिप्पणी की है। अमेठी के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में कार्यरत एक संविदा शिक्षिका की सेवा समाप्त करने के फैसले पर अदालत ने अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही राज्य सरकार से यह बताने को कहा है कि 15 साल या उससे अधिक समय से संविदा पर काम कर रहे शिक्षकों को नियमित करने के लिए क्या नीति या योजना बनाई गई है।

मामला सिर्फ एक शिक्षिका तक सीमित नहीं

कोर्ट ने संकेत दिया कि याचिका का असर केवल संबंधित शिक्षिका तक सीमित नहीं है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में लंबे समय से संविदा पर सेवाएं दे रहे हजारों शिक्षकों की नौकरी और भविष्य का सवाल भी इससे जुड़ा है। इसी को देखते हुए अदालत ने सरकार से नियमितीकरण को लेकर उसकी नीति और अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर 2026 को होगी।

16 साल से लगातार सेवा दे रही थीं अर्चना

यह मामला अमेठी के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में संविदा शिक्षिका अर्चना बूध से जुड़ा है। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने 16 जून 2026 को जारी उस विभागीय आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें उनकी संविदा का नवीनीकरण नहीं करने का फैसला लिया गया था। अदालत ने फिलहाल शिक्षिका को अपनी सेवा जारी रखने का निर्देश दिया है।

2010 से हर साल होता रहा संविदा नवीनीकरण

शिक्षिका की ओर से अधिवक्ता सक्षम अग्रवाल ने अदालत को बताया कि अर्चना 16 जनवरी 2010 से विद्यालय में लगातार सेवाएं दे रही हैं। करीब 16 वर्षों तक उनकी संविदा का हर साल नवीनीकरण किया जाता रहा, लेकिन जून 2026 में विभाग ने अचानक इसे आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। याचिका में यह भी दलील दी गई कि शिक्षिका की उम्र अब 39 वर्ष हो चुकी है। ऐसे में उनके लिए किसी दूसरे विद्यालय में नई भर्ती के जरिए नौकरी हासिल करना भी मुश्किल है। अधिवक्ता ने कहा कि इतने लंबे समय तक सेवा देने के बाद अचानक रोजगार से बाहर कर देना उनके लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है।

शिक्षक को राष्ट्र निर्माता बताकर कोर्ट ने जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता पर तल्ख टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि समाज में शिक्षक को राष्ट्र निर्माता के रूप में देखा जाता है, लेकिन इस मामले में 16 साल तक सेवाएं देने वाली शिक्षिका को अचानक असहाय स्थिति में छोड़ने जैसा रवैया सामने आया है। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि शिक्षिका के कामकाज को लेकर कोई शिकायत या उनके खिलाफ कोई व्यक्तिगत आरोप सामने नहीं आया है। ऐसे में लंबे समय से सेवा दे रहे संविदा शिक्षकों के भविष्य को लेकर सरकार की नीति पर जवाब मांगा जाना अहम माना जा रहा है।

अब सरकार के जवाब पर टिकी नजर

हाईकोर्ट के इस रुख के बाद प्रदेश में लंबे समय से संविदा पर काम कर रहे शिक्षकों के बीच नियमितीकरण की उम्मीद को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। हालांकि, फिलहाल अदालत ने केवल संबंधित शिक्षिका को अंतरिम राहत दी है और सरकार से नीति को लेकर जवाब मांगा है। इस मामले में अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी।

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