केंद्र ने पंजाब को दिए 1,246 करोड़, तरुण चुघ का दावा- सरकार 827 करोड़ ही खर्च कर सकी

Read Time:8 Minute, 22 Second

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर किसानों और कृषि क्षेत्र को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब की सबसे बड़ी समस्या संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि सरकार की नीयत, नीति और योजनाओं को लागू करने की क्षमता की कमी है। तरुण चुघ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पंजाब के किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उनके मुताबिक, केंद्र ने खेती को ‘बीज से बाजार’ तक जोड़ने के लिए पूरी वैल्यू चेन विकसित करने पर जोर दिया है। उन्होंने फसल विविधीकरण, पराली प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, बैंक ऋण और स्वयं सहायता समूहों जैसी योजनाओं का जिक्र किया। चुघ का कहना है कि इन पहलों का उद्देश्य किसानों को केवल फसल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उन्हें बड़े बाजार और कृषि आधारित उद्योगों से जोड़ना है। तरुण चुघ ने राज्यसभा में उनके द्वारा उठाए गए दो सवालों के जवाब का हवाला देते हुए कहा कि पंजाब के कृषि क्षेत्र के लिए केंद्र की ओर से संसाधनों की कोई कमी नहीं रखी गई है। उनके अनुसार, वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच फसल विविधीकरण और फसल अवशेष प्रबंधन कार्यक्रमों के लिए पंजाब को 1,246.25 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।

चुघ के मुताबिक, इस राशि में से 974.41 करोड़ रुपये जारी भी किए जा चुके हैं। हालांकि, उनका दावा है कि पंजाब सरकार इनमें से 827.12 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाई। उन्होंने इसी आंकड़े को आधार बनाते हुए भगवंत मान सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र से मिलने वाले संसाधनों का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं किया जाएगा तो किसानों तक योजनाओं का लाभ कैसे पहुंचेगा। चुघ ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार उपलब्ध अवसरों और संसाधनों को जमीनी स्तर पर परिणाम में बदलने में नाकाम रही है। पराली प्रबंधन को लेकर भी तरुण चुघ ने केंद्र सरकार की योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि किसानों को आधुनिक कृषि मशीनरी खरीदने के लिए 50 प्रतिशत तक सब्सिडी और कस्टम हायरिंग सेंटरों को 80 प्रतिशत तक सहायता दी जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पराली को बायो-सीएनजी, बायो-एनर्जी और दूसरे औद्योगिक उपयोगों में इस्तेमाल करने के लिए सप्लाई चेन विकसित करने के उद्देश्य से 65 प्रतिशत तक पूंजीगत सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। चुघ ने कहा कि केंद्र सरकार पराली को समस्या के बजाय किसानों के लिए आर्थिक संसाधन बनाने की दिशा में काम कर रही है। फसल विविधीकरण को लेकर चुघ ने कहा कि धान पर पंजाब की निर्भरता कम करना जरूरी है। इसके लिए कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने की जरूरत है। उनके अनुसार, केंद्र सरकार की योजनाओं का उद्देश्य पंजाब में कृषि के मौजूदा ढांचे को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाना है।

खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में भी तरुण चुघ ने केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2014 से पहले पंजाब में केवल 8 फूड प्रोसेसिंग इकाइयों को मंजूरी मिली थी, जबकि मोदी सरकार के कार्यकाल में 49 नई इकाइयों को मंजूरी दी गई। चुघ ने प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना का जिक्र करते हुए कहा कि पंजाब में इसके विभिन्न घटकों के तहत 79 परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। इन परियोजनाओं की कुल लागत 1,663.76 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि इनके लिए 454.98 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की गई और 378.62 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य सिर्फ उद्योग स्थापित करना नहीं है। इससे किसानों की उपज का मूल्य बढ़ाने, रोजगार पैदा करने और पंजाब में कृषि आधारित उद्योगों को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना का जिक्र करते हुए चुघ ने दावा किया कि पंजाब में 3,506 सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को मंजूरी मिली है। उनके अनुसार, करीब 1,309 करोड़ रुपये की परियोजनाएं विकसित हुई हैं और बैंकों की ओर से लगभग 990 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि 1,404 स्वयं सहायता समूहों को सीड कैपिटल उपलब्ध कराया गया है और पटियाला में इन्क्यूबेशन सेंटर भी स्थापित किया गया है। चुघ के मुताबिक, इन पहलों के जरिए स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और उन्हें राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है। तरुण चुघ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य पंजाब को केवल गेहूं और धान की खेती तक सीमित रखना नहीं है। उनका दावा है कि केंद्र सरकार पंजाब को कृषि आधारित उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, निर्यात, मूल्य संवर्धन और ग्रामीण उद्यमिता का बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रही है। हालांकि, चुघ ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार इन योजनाओं का अपेक्षित लाभ किसानों तक पहुंचाने में विफल रही है। उन्होंने भगवंत मान सरकार पर प्रशासनिक अक्षमता और कमजोर क्रियान्वयन का आरोप लगाते हुए कहा कि पंजाब के पास विकास के लिए पर्याप्त संसाधन और अवसर मौजूद हैं, लेकिन उनका प्रभावी इस्तेमाल जरूरी है। चुघ ने कहा कि पंजाब का किसान मेहनत करने में पीछे नहीं है, बल्कि सरकारी नीतियों और उनके क्रियान्वयन की कमी उसकी प्रगति में बाधा बन रही है। उन्होंने दावा किया कि यदि केंद्र की योजनाओं को राज्य में पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए तो पंजाब एक बार फिर देश का प्रमुख कृषि और एग्रो-इंडस्ट्रियल राज्य बन सकता है।

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Please follow and like us:
Pin Share

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *