विधान भवन के बाहर सपा का प्रदर्शन, लगाए सरकार विरोधी नारे - Uttarakhand Samachar

उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले सोमवार को राजधानी लखनऊ में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों ने विधान भवन परिसर में सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान पार्टी नेताओं ने अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी, सरकारी स्कूलों के बंद होने, नीट परीक्षा पेपर लीक, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्य सरकार को घेरा। विधान भवन परिसर में चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के सामने बड़ी संख्या में सपा नेताओं और विधायकों ने तख्तियां, बैनर और पोस्टर लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कुछ नेताओं ने प्रतीकात्मक विरोध जताने के लिए अपने सिर पर ‘चंदा पेटिका’ लिखे दानपात्र भी रखे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विभिन्न जनहित के मुद्दों पर जवाब मांगा।

सपा विधायक रागिनी सोनकर ने आरोप लगाया कि प्रदेश में पिछले दस वर्षों के दौरान 26 हजार से अधिक सरकारी विद्यालय बंद कर दिए गए हैं। उनका दावा था कि इसके कारण हजारों छात्र-छात्राओं, विशेषकर बेटियों की शिक्षा प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा और युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है और केवल दावे करने तक सीमित है। सपा विधायक अतुल प्रधान ने अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावे की चोरी के मामले को उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) अपनी रिपोर्ट सौंप चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि जनता की आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने सरकार विरोधी नारे भी लगाए।

सपा नेता कमाल अख्तर ने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है, प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने से युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है और किसान खाद की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार जनता की समस्याओं पर गंभीर चर्चा से बच रही है। समाजवादी पार्टी का कहना है कि वह इन सभी मुद्दों को विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों में प्रमुखता से उठाएगी। विपक्ष का आरोप है कि मानसून सत्र की अवधि सीमित रखकर सरकार व्यापक चर्चा से बचने का प्रयास कर रही है। उत्तर प्रदेश विधानमंडल का मानसून सत्र 3 अगस्त से 6 अगस्त तक चलेगा। इस सत्र को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले का महत्वपूर्ण सत्र माना जा रहा है। इसी दौरान राज्य सरकार 4 अगस्त को वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट भी दोनों सदनों में पेश करेगी, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है।

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