ऑनलाइन बुकिंग और बेहतर सड़कों का असर: त्रियुगीनारायण में तीर्थयात्रियों की संख्या में भारी बढ़त।

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उत्तराखंड के पौराणिक और ऐतिहासिक त्रियुगीनारायण मंदिर ने इस वर्ष शीतकालीन यात्रा के दौरान सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ है। 24 अक्तूबर से 21 फरवरी के बीच संपन्न हुई इस यात्रा अवधि में कुल 47,868 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 7,868 अधिक है। यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि अब तीर्थयात्री केवल गर्मियों के सीजन तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि सर्दियों की बर्फबारी के बीच भी त्रियुगीनारायण की आध्यात्मिक ऊर्जा उन्हें अपनी ओर खींच रही है।

अखंड ज्योति और दिव्य विवाह का महत्व

मान्यता है कि सतयुग में भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह इसी स्थल पर हुआ था, जिसके साक्षी स्वयं ब्रह्मा और विष्णु थे। मंदिर के भीतर जल रहा अखंड अग्निकुंड उसी समय से प्रज्वलित माना जाता है। श्रद्धालु इस पवित्र अग्नि की भस्म को अपने साथ ले जाते हैं और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हैं।

वेडिंग डेस्टिनेशन: सेलिब्रिटीज से लेकर आम जन तक की पसंद

त्रियुगीनारायण मंदिर अब देश के सबसे पसंदीदा ‘वेडिंग डेस्टिनेशन’ में से एक बन चुका है।

  • विवाहों की झड़ी: इस वर्ष महाशिवरात्रि और शीतकालीन शुभ मुहूर्तों में रिकॉर्ड संख्या में विवाह संपन्न हुए।

  • इकोनॉमी बूस्ट: सालभर चलने वाले विवाह आयोजनों से स्थानीय होटल, परिवहन, और पंडिताई से जुड़े परिवारों की आय में भारी वृद्धि हुई है।

आंकड़ों की जुबानी: बढ़ती लोकप्रियता

पिछले दो वर्षों के आंकड़ों का तुलनात्मक विवरण इस प्रकार है:

यात्रा वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या स्थिति
2024-25 लगभग 40,000 सामान्य
2025-26 47,868 रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि
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