मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली उत्तराखंड सरकार ने सुशासन की नई परिभाषा गढ़ते हुए “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम को सफलता के नए शिखर पर पहुंचा दिया है। प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए शुरू किया गया यह अभियान अब आम जनता के लिए सबसे भरोसेमंद सहारा बनकर उभरा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य जनता की समस्याओं को दफ्तरों के बजाय उनके घर के पास ही सुनना और समाधान करना है। आंकड़ों में सफलता की कहानी: 21 जनवरी 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के सभी 13 जनपदों में कुल 427 कैंपों का भव्य आयोजन किया जा चुका है। इन कैंपों की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनमें 3 लाख 44 हजार से अधिक नागरिकों ने सीधे तौर पर भागीदारी की। शिकायतों का त्वरित निस्तारण: अभियान के दौरान प्रशासन को कुल 35,079 शिकायत पत्र प्राप्त हुए। मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों का असर रहा कि इनमें से 23,844 शिकायतों का सफलतापूर्वक निस्तारण कर दिया गया है। बाकी बची शिकायतों पर भी संबंधित विभाग पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रहे हैं। एक ही छत के नीचे सारी सुविधाएं: इस कार्यक्रम ने नागरिकों को सरकारी दफ्तरों की भागदौड़ से बचाया है। कैंपों में ही 46,901 आवेदन प्रमाण पत्रों और अन्य सेवाओं का निष्पादन किया गया। सबसे बड़ी राहत राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के रूप में मिली, जहां 1,86,795 नागरिकों को सीधा लाभ प्रदान किया गया। Please follow and like us: Share Post Share Post navigation जम्मू-कश्मीर: खन्नीटॉप में सेना की बस खाई में गिरने से मचा हड़कंप, 17 जवान थे सवार। उत्तराखंड की विरासत: तांबे के बर्तनों और शिल्पकारों के हुनर को दुनिया के सामने पेश करेगी धामी सरकार।