धार्मिक पहचान की सुरक्षा पर सख्त कदम: धर्मांतरण रोकने से लेकर अवैध मदरसों पर कार्रवाई तक

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अजमेर जिले के तीर्थराज पुष्कर में शुक्रवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अखिल भारतीय उत्तराखंड धर्मशाला के दूसरे तल का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में प्रदेश के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत सहित बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखंडियों, स्थानीय लोगों और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।मुख्यमंत्री धामी ने इस मौके पर आश्रम प्रबंधन को 50 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता देने की घोषणा की। इससे पूर्व उत्तराखंड सरकार धर्मशाला के निर्माण हेतु 1 करोड़ रुपये जारी कर चुकी है। धार्मिक महत्व पर बोले मुख्यमंत्री सीएम धामी ने कहा कि धार्मिक ग्रंथों में पुष्कर को पंचतीर्थों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है और इसे ‘तीर्थों का गुरु’ कहा गया है। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा तब पूर्ण मानी जाती है जब भक्त पुष्कर सरोवर में पवित्र स्नान कर लें। उन्होंने बताया कि पुष्कर की आध्यात्मिक महिमा से प्रेरित होकर ही उनके माता-पिता ने उनका नाम ‘पुष्कर’ रखा।देश में चल रहा सांस्कृतिक पुनर्जागरण’ धामी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की आध्यात्मिक धरोहर को नए आयाम मिल रहे हैं। उन्होंने अयोध्या में श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकाल लोक और केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम के पुनर्निर्माण परियोजनाओं को सांस्कृतिक नवजागरण की मिसाल बताया। वहीं, उत्तराखंड में केदारखंड-मानसखंड मंदिर क्षेत्रों के सौंदर्यीकरण, शारदा कॉरिडोर, ऋषिकेश कॉरिडोर और दून यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज पर तेज गति से काम जारी है। धार्मिक पहचान और परंपराओं की सुरक्षा पर भी बोले मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की धार्मिक संस्कृति को सुरक्षित रखने के लिए सरकार कई कठोर फैसले ले रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए सख्त कानून लागू किया गया है। 10 हजार एकड़ अवैध कब्जों से भूमि मुक्त कराई गई है और मदरसा बोर्ड को समाप्त करते हुए 250 से अधिक अवैध मदरसों को बंद किया गया है। साथ ही सभी विद्यालयों में सरकारी बोर्ड का पाठ्यक्रम अनिवार्य किया गया है।प्रवासी उत्तराखंडियों को संदेश सीएम धामी ने प्रवासी उत्तराखंडियों से कहा कि वे दुनिया में कहीं भी रहें, अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल पहचान को गर्व के साथ आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को देश की आध्यात्मिक राजधानी बनाने का लक्ष्य सरकार का संकल्प है और इसमें हर उत्तराखंडी की सहभागिता जरूरी है।

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