बड़ी खबर: 2 साल 8 महीने बाद आज आएगा फैसला, ADJ कोर्ट पर कड़ी सुरक्षा - Uttarakhand Samachar

बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में आज (शुक्रवार) कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (एडीजे कोर्ट) फैसला सुनाएगा। इस मामले पर उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश की नजरें टिकी हैं। फैसले को लेकर कोटद्वार में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

गढ़वाल मंडल के विभिन्न जिलों से पुलिस बल को बुलाया गया है और अदालत परिसर के बाहर बैरिकेडिंग कर दी गई है। अदालत के आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

सुनवाई की पूरी प्रक्रिया
इस मामले की पहली सुनवाई 30 जनवरी 2023 को एडीजे कोर्ट, कोटद्वार में हुई थी। एसआईटी जांच के बाद अभियोजन पक्ष ने अदालत में 500 पेज का आरोप पत्र दाखिल किया था। 28 मार्च 2023 से गवाहों की पेशी शुरू हुई, जिसमें अभियोजन पक्ष की ओर से 47 अहम गवाहों की गवाही हुई।

हालांकि एसआईटी ने 97 गवाह सूचीबद्ध किए थे, लेकिन उनमें से 47 को ही अदालत में प्रस्तुत किया गया। बीते 19 मई को विशेष लोक अभियोजक अवनीश नेगी द्वारा बचाव पक्ष की बहस का जवाब देने के साथ ही सुनवाई पूरी हुई थी।

तीनों आरोपी
इस हत्याकांड में वनंत्रा रिज़ॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, उसके कर्मचारी सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता आरोपी हैं। तीनों पर हत्या का आरोप तय होने के बाद मुकदमे की कार्यवाही शुरू हुई थी।

सुरक्षा व्यवस्था और निषेधाज्ञा लागू
फैसले के मद्देनजर कोटद्वार और आसपास के इलाकों में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। देहरादून, हरिद्वार, टिहरी और उत्तरकाशी से अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। डेढ़ कंपनी पीएसी के जवान भी लगाए गए हैं।

कोटवाल रमेश तनवार ने बताया कि अदालत परिसर में किसी बाहरी व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर कई बैठकें और मॉक ड्रिल की हैं।

200 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू
एसडीएम कोटद्वार सोहन सिंह सैनी ने अदालत परिसर के 200 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा (धारा 163) लागू कर दी है। इस क्षेत्र में समूह में प्रवेश, नारेबाजी, धरना-प्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए चार मजिस्ट्रेट—तहसीलदार साक्षी उपाध्याय, एआरटीओ ज्योति शंकर मिश्रा, अजय अष्टवाल और मनोहर सिंह नेगी को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

एसडीएम ने स्पष्ट किया कि यदि किसी ने निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया तो उस पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी। हालांकि अधिवक्ता और अदालत कर्मचारी इससे बाहर रहेंगे।

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