कांग्रेस को पालिकाओं में मिली थोड़ी सफलता, निगमों में गहरी निराशा
निकाय चुनाव में कांग्रेस नगर निगमों में अपनी हार का गम इस बार भी दूर नहीं कर पाई। लेकिन, पिछले निकाय चुनाव की तुलना में नगर पालिका व नगर पंचायतों में बढ़त बनाकर थोड़ी खुशी जरूर मिली है। कई निकायों में सत्तारोधी रुझान को भुनाने में कांग्रेस कामयाब नहीं रही। इसका फायदा निर्दलीय उम्मीदवारों को मिला।नगर निकाय चुनाव से कांग्रेस 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए एक संदेश देने की कोशिश में थी। कांग्रेस दिग्गज भी सत्तारोधी रुझान व डबल इंजन सरकार की नाकामियों को लेकर निकाय चुनाव में जीत का दावा कर रही थी। लेकिन, नगर निगमों में मेयर पद पर कांग्रेस का प्रदर्शन उम्मीदों के विपरीत रहा। रात नौ बजे तक चुनाव नतीजों के रुझान पर 11 नगर निगमों में से एक मात्र हल्द्वानी नगर निगम में मेयर पद कांग्रेस व भाजपा के मुकाबला रोचक बना है। मतगणना के अलग-अलग राउंड में कभी कांग्रेस को बढ़त मिली है तो कभी भाजपा आगे है।वर्ष 2018 के निकाय चुनाव में कांग्रेस को हरिद्वार व कोटद्वार नगर निगम में मेयर पद पर जीत मिली थी। जबकि 20 नगर पंचायत व नगर पालिकाओं में अध्यक्ष पद पर कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। पिछले निकाय चुनाव की तुलना में इस बार नगर पालिका और नगर पंचायतों में कांग्रेस को बढ़त मिली है। समाचार लिखे जाने तक कांग्रेस ने नगर पालिका पुरोला, बेरीनाग, रानीखेत, भवाली, भीमताल, बाजपुर, गौचर, ज्योतिर्मठ, विकासनगर, धारचूला, डीडीहाट, नैनीताल और 13 नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद जीत हासिल की है।ग्रीष्मकालीन राजधानी में कांग्रेस ने लहराया परचम
प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में कांग्रेस ने परचम लहराया है। नगर पंचायत गैरसैंण में अध्यक्ष पद पर कांग्रेस ने जीत हासिल की। इसके अलावा, नगर पंचायत अगस्त्यमुनि, स्वर्णाश्रम जौंक, सतपुली, थैलीसैंण, झबरेड़ा, भगवानपुर, थराली, गैरसैंण, नंदानगर घाट, गरुड़, द्वाराहाट, भिकियासैंण में अध्यक्ष पर कांग्रेस ने जीत हासिल की है।
निकाय चुनाव में जनादेश को कांग्रेस स्वीकार करती है। कांग्रेस ने निकायों में अच्छा प्रदर्शन किया है। पार्टी कार्यकर्ताओं ने पूरी मेहनत के साथ चुनाव लड़ा। कई नगर पालिकाओं व नगर पंचायतों में कांग्रेस ने जीत हासिल की है। कई निकायों में जारी मतगणना के रुझान में कांग्रेस प्रत्याशी आगे हैं।
– करन माहरा, प्रदेश अध्यक्ष

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