हरकी पैड़ी से लेकर घाटों तक गंगा में गूंजी आस्था और आजीविका की आवाज

हरिद्वार धर्मनगरी में एक कहावत है ‘बहती गंगा कृपा बरसातीं हैं, ठहरीं तो देतीं हैं धन-दौलत’। यह चरितार्थ तब होता है जब गंगनहर की वार्षिक...