राज्यपाल ले. जनरल गुरमीत सिंह ने ’वर्ल्ड ट्रॉमा डे’ के अवसर पर ई-उद्घाटन द्वारा एम्स ऋषिकेश के ट्रॉमा विभाग का टोल फ्री नंबर किया जारी

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’वर्ल्ड ट्रॉमा डे’ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ले. जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने ई-उद्घाटन द्वारा एम्स ऋषिकेश के ट्रॉमा विभाग का टोल फ्री नंबर जारी किया। इस अवसर पर उन्होंने एम्स द्वारा संचालित ट्रॉमा रथ अभियान की सराहना की और कहा कि ट्रॉमा चिकित्सा के प्रति आम लोगों को जागरुक करने के लिए इस अभियान में रेडक्रॉस व आशा कार्यकर्ताओं को भी शामिल करने की जरूरत है।

सोमवार को एम्स ऋषिकेश के सप्ताहव्यापी ट्रॉमा जागरुकता सप्ताह का विधिवत समापन हो गया। इस दौरान ’वर्ल्ड ट्रॉमा डे’ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने अपने सैन्य कार्यकाल के अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि किसी भी दुर्घटना में घायल हुए व्यक्ति को बचाने के लिए पहले शुरुआती 1 घंटे का गोल्डन ऑवर का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस एक घंटे के दौरान घायल व्यक्ति को यदि समय रहते नजदीकी अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है। अस्पताल पहुंचने में विलंब होने की दशा में जीवन बचने का जोखिम बढ़ जाता है।
चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ सहित हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम समाज के प्रत्येक व्यक्ति को दुर्घटनाओं को रोकने और ट्रॉमा चिकित्सा के संबंध में जागरुक करें। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं को कम करना एक बड़ी चुनौती है और इस चुनौती से निपटने के लिए व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि इस अभियान में एसडीआरएफ, एनसीसी और रेडक्रॉस की टीमों के अलावा आशा कार्यकर्ताओं को भी शामिल किया जाना चाहिए। एम्स ऋषिकेश द्वारा सप्ताह भर तक संचालित ट्रॉमा रथ द्वारा विभिन्न स्थानों पर आयोजित किए गए जन-जागरूकता कार्यक्रमों की राज्यपाल ने सराहना की और कहा कि एम्स ऋषिकेश द्वारा शीघ्र संचालित होने वाली हेली एम्बुलेंस और टेलिमेडिसिन सुविधा से विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस पहाड़ी राज्य में स्वास्थ्य से संबंधित चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। राज्यपाल ने इस मौके पर एम्स के ट्रॉमा विभाग के टोल फ्री नंबर 18001804278 व ब्लड डोनेशन कैम्प का ई-उद्घाटन भी किया।

इससे पूर्व एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर (डॉ.)मीनू सिंह ने राज्यपाल का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड में अधिकतर मौतें दुर्घटनाओं के कारण होती हैं। ऐसे में एम्स का प्रयास है कि अधिक से अधिक लोगों को ट्रॉमा के प्रति सजग और जागरूक किया जाय। उन्होंने केंद्र सरकार का आभार प्रकट करते हुए कहा कि केंद्र की मदद से शीघ्र ही एम्स ऋषिकेश से हेली एम्बुलेंस सेवा की शुरूआत होने जा रही है। इस सेवा के शुरू हो जाने पर राज्य में ट्रॉमा के दौरान होने वाली मृत्यु दर को कम किया जा सकेगा।

कार्यक्रम को दिल्ली एम्स के ट्रॉमा विभाग के एचओडी प्रोफेसर अमित गुप्ता ने भी संबोधित किया। उन्होंने राज्य में दुर्घटना मृत्यु दर कम करने के लिए सिस्टम को विकसित करने की आवश्यकता बताई और कहा कि इसके लिए राजमार्गों के निकट रहने वाले लोगों को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है। विभिन्न सुझाव देते हुए उन्होंने प्री- हॉस्पिटल केयर, 108 सेवा एम्बुलेंस की टीम को नियमित अंतराल में प्रशिक्षण दिए जाने, राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में ट्रॉमा के दौरान बचाव की जानकारी दिए जाने और दुर्घटना के दौरान घायल व्यक्ति को इलाज की सुविधा वाले अस्पताल तक ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। इससे पूर्व ट्रॉमा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. कमर आजम ने सप्ताहभर तक संचालित ट्रॉमा रथ के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ट्रॉमा के मामले दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। कैंसर की तरह फैल रहे इस मामले में हमें ट्रॉमा जागरुकता और ट्रॉमा चिकित्सा को मजबूत करने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम को मनोरोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रवि गुप्ता, ट्रॉमा रथ के प्रभारी व सर्जन डॉक्टर मधुर उनियाल आदि ने भी संबोधित किया। संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी हरीश मोहन थपलियाल के संचालन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान डीन एकेडेमिक प्रो. जया चतुर्वेदी, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. संजीव कुमार मित्तल, कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्रिंसिपल स्मृति अरोड़ा, बालरोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नवनीत भट, न्यूरो सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रजनीश अरोड़ा, ट्रॉमा विभाग के डॉक्टर अजय कुमार, डॉ. भास्कर सरकार, उपनिदेशक प्रशासन ले. कर्नल ए.आर. मुखर्जी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शशिकांत, विधि अधिकारी प्रदीप कुमार पांडेय, चीफ नर्सिंग अधिकारी रीता शर्मा, सीनियर लाइब्रेरियन संदीप सिंह, ए.एन.एस. महेश देवस्थले, कमलेश समेत कई लोग मौजूद।

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