चमोली ब्रेकिंग न्यूज़: क्षेत्र पंचायत सदस्यों के विरोध से रुकी BDC बैठक - Uttarakhand Samachar

चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले के थराली विकासखंड सभागार में मंगलवार को आयोजित ब्लॉक विकास परिषद (BDC) की बैठक भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई। बैठक शुरू होते ही कई क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने राज्य वित्त आयोग और 15वें वित्त आयोग की धनराशि के आवंटन में भेदभाव तथा सोलर स्ट्रीट लाइटों की खरीद में कथित अनियमितताओं का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि बैठक को बीच में ही रोकना पड़ा और अंततः सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

बैठक की शुरुआत में ही उठे गंभीर आरोप

बैठक शुरू होते ही चिडिंगा क्षेत्र पंचायत सदस्य राकेश जोशी और ग्वालदम क्षेत्र पंचायत सदस्य भावना रावत ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के लिए मिलने वाली राज्य वित्त और 15वें वित्त आयोग की धनराशि का वितरण समान रूप से नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों की अनदेखी की गई है, जबकि कुछ स्थानों को प्राथमिकता दी गई। इसके साथ ही सोलर स्ट्रीट लाइटों की खरीद प्रक्रिया में भी पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई।

छह क्षेत्र पंचायत सदस्य धरने पर बैठे

धन आवंटन और खरीद प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा की मांग का समर्थन करते हुए बूंगा के क्षेत्र पंचायत सदस्य भानु प्रकाश, बैनोली के मनमोहन रावत, माल बज्वाड़ की बबिता रावत और सूना की सुमन देवराड़ी भी विरोध में शामिल हो गए। सभी छह सदस्य सदन के भीतर ही धरने पर बैठ गए और जब तक आरोपों पर जवाब नहीं मिला, तब तक बैठक नहीं चलने देने की बात पर अड़े रहे। लगभग दो घंटे तक लगातार नारेबाजी, विरोध और हंगामे का माहौल बना रहा।

कई प्रयासों के बावजूद नहीं चल सकी बैठक

ब्लॉक प्रशासन और अधिकारियों ने कई बार बैठक को सामान्य रूप से संचालित करने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शन कर रहे सदस्यों ने अपनी मांगों पर अडिग रहते हुए कार्यवाही आगे नहीं बढ़ने दी। इस दौरान ब्लॉक प्रमुख प्रवीण पुरोहित और विरोध कर रहे क्षेत्र पंचायत सदस्यों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली, जिससे सदन का माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।

प्रधान संगठन ने भी किया बैठक का बहिष्कार

हंगामे के बीच प्रधान संगठन ने भी नाराजगी जताई। संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ जनप्रतिनिधियों के विरोध के कारण पूरे विकासखंड के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी। प्रधान संगठन ने बैठक का बहिष्कार करने की घोषणा की और सभी प्रधान सदन से बाहर निकल गए। इसके बाद ब्लॉक प्रमुख प्रवीण पुरोहित ने बैठक को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।

विकास कार्यों पर चर्चा नहीं हो सकी

बैठक में मौजूद कई जनप्रतिनिधियों ने आग्रह किया कि उनके क्षेत्रों की सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य और अन्य विकास योजनाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। उनका कहना था कि बैठक बाधित होने से आम जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव लंबित रह गए। हालांकि भारी हंगामे के कारण किसी भी विषय पर विस्तृत चर्चा संभव नहीं हो सकी और पूरा सत्र बिना किसी ठोस निर्णय के समाप्त हो गया।

प्रधान संगठन ने जताई नाराजगी

प्रधान संगठन के अध्यक्ष राजेंद्र रावत ने कहा कि कई प्रधान 15 से 20 किलोमीटर दूर-दराज के गांवों से पैदल चलकर बैठक में शामिल होने पहुंचे थे। उनका आरोप था कि कुछ लोगों ने अपने निजी हितों के चलते पूरे सदन की कार्यवाही बाधित कर दी, जिससे विकास कार्य प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए सभी जनप्रतिनिधियों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए ताकि विकास कार्य बाधित न हों।

अब सभी की नजर अगले फैसले पर

बैठक स्थगित होने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि धन आवंटन और सोलर स्ट्रीट लाइट खरीद से जुड़े आरोपों की जांच होती है या नहीं। साथ ही प्रशासन अगली बैठक कब बुलाएगा और लंबित विकास कार्यों पर चर्चा कब होगी, इस पर भी सभी की नजर बनी हुई है।

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