वर्ष 2027 में धर्मनगरी हरिद्वार में आयोजित होने वाले ‘महाकुंभ मेले’ को भव्य और सुगम बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार के तमाम विभागों ने अभी से कमर कस ली है। इस बार कुंभ मेले में करोड़ों की संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उत्तराखंड परिवहन निगम (रोडवेज) एक अभूतपूर्व रणनीति पर काम कर रहा है। निगम का मुख्य फोकस यात्रियों को जाम से निजात दिलाने और मेला क्षेत्र के भीतर तक बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने पर है। पहली बार मेला क्षेत्र के अंदर होगा बसों का संचालन कुंभ मेले के इतिहास में अब तक परिवहन निगम की बसें मुख्य रूप से मेला परिसर के बाहर तक ही सीमित रहती थीं। यात्री अन्य राज्यों से हरिद्वार तो आ जाते थे, लेकिन परिसर के भीतर उन्हें लंबी दूरी पैदल या निजी वाहनों से तय करनी पड़ती थी। प्रबंध निदेशक रीना जोशी के अनुसार, इस बार रणनीति बदली गई है। पहली बार परिवहन निगम की बसें कुंभ क्षेत्र के भीतर भी यात्रियों को लाती-ले जाती नजर आएंगी। 150 इलेक्ट्रिक बसों से मिलेगा ‘ग्रीन कुंभ’ का संदेश पर्यावरण संरक्षण और सुगम यातायात को देखते हुए निगम ने मेला क्षेत्र में 150 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का निर्णय लिया है। ये बसें ‘प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना’ के तहत संचालित की जाएंगी। चार्जिंग स्टेशन: देहरादून और हरिद्वार में चार्जिंग स्टेशनों का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है, जो अगले 6 महीनों में पूरा होने की उम्मीद है। अनुबंध: चार्जिंग स्टेशन बनते ही अनुबंध के आधार पर बसों का संचालन शुरू होगा, जिन्हें कुंभ के दौरान विशेष रूप से मेला ड्यूटी में लगाया जाएगा। 700 नई बसों का प्रस्ताव और कुंभ निधि यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए परिवहन निगम ने कुंभ निधि से 700 अतिरिक्त बसें उपलब्ध कराने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इसका उद्देश्य न केवल हरिद्वार के भीतर, बल्कि अन्य राज्यों (दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा) से आने वाले यात्रियों को समय पर और आरामदायक यात्रा उपलब्ध कराना है। MD रीना जोशी का बयान उत्तराखंड परिवहन निगम की प्रबंध निदेशक रीना जोशी ने जानकारी देते हुए बताया कि “पिछले कुंभ के अनुभवों से सीखते हुए इस बार हम अधिक बड़ी योजना पर काम कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि यात्रियों को उनके गंतव्य से मेला परिसर के नजदीकी पॉइंट्स तक सीधा पहुंचाया जा सके। इसके लिए बसों के बेड़े को बढ़ाया जा रहा है और इलेक्ट्रिक बसों का समावेश एक मील का पत्थर साबित होगा।” Please follow and like us: Share Post Share Post navigation देवभूमि के मूल स्वरूप से समझौता नहीं; UCC और दंगारोधी कानून हमारी प्रतिबद्धता: CM धामी। आपदा की आहट और भारी हिमपात का डर; श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए नंदा देवी राजजात यात्रा की तिथि बदली।